सुप्रीम कोर्ट ने कहा— “हमारी टिप्पणियों को मज़ाक न समझें, हम बेहद गंभीर हैं”

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर किसी व्यक्ति की मौत या गंभीर चोट आवारा कुत्तों के हमले से होती है, तो डॉग फीडर्स भी इसकी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मुद्दा मज़ाक का नहीं है और समाज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कोर्ट ने कहा कि कई लोग बिना जिम्मेदारी लिए आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, लेकिन उनके व्यवहार, आक्रामकता और आस-पड़ोस में पैदा होने वाले खतरे की कोई जिम्मेदारी नहीं लेते। ऐसे मामलों में फीडर्स की पहचान कर उन्हें जवाबदेह ठहराना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर ठोस नीति बनाने को कहा, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी सोशल और कानूनी दोनों स्तरों पर बड़ी बहस का कारण बन गई है।

