हाईकोर्ट ने कहा—कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए, बेबुनियाद आरोपों पर कार्रवाई नहीं चल सकती

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि घरेलू-हिंसा कानून का इस्तेमाल किसी पर दबाव बनाने या गैरज़रूरी परेशान करने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पाया कि पत्नी द्वारा लगाए गए कई आरोप स्पष्ट रूप से गलत थे और किसी मजबूत सबूत पर आधारित नहीं थे।
इसलिए कोर्ट ने पति और उसकी बहनों के खिलाफ दर्ज FIR को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामले कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बन जाते हैं और इससे असली पीड़ितों को भी न्याय पाने में मुश्किल होती है।
हाईकोर्ट का मानना है कि कानून लोगों की सुरक्षा के लिए है, न कि झूठे आरोप लगाकर किसी को परेशान करने के लिए। इस फैसले को घरेलू हिंसा मामलों में एक अहम दिशा के रूप में देखा जा रहा है।






