कवयित्री ने कहा— सवर्ण होना अपराध न बन जाए, हर्षा रिछारिया बोलीं— मुझे इससे दिक्कत

यूजीसी (UGC) से जुड़े मुद्दे को लेकर देश की राजनीति और सामाजिक बहस तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूजीसी का विरोध कुछ जातिवादी मानसिकता वाले लोग कर रहे हैं, जो समाज में भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
मायावती ने कहा कि शिक्षा से जुड़े संस्थानों और नीतियों को जाति के चश्मे से देखना गलत है और इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर इस मुद्दे को जातिगत रंग दे रहे हैं।
वहीं, इस बहस में एक कवयित्री का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि “सवर्ण होना कहीं अपराध न बन जाए”। उन्होंने आशंका जताई कि सामाजिक विमर्श एकतरफा दिशा में जा रहा है, जिससे नए तरह के भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है।
इस मामले पर हर्षा रिछारिया ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की सोच और बयानबाजी से आपत्ति है, क्योंकि इससे समाज में अनावश्यक तनाव और विभाजन पैदा होता है।
यूजीसी को लेकर चल रही यह बहस अब राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है। अलग-अलग वर्गों से लोग अपने-अपने नजरिए से प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जिससे यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।






