लाठियों की चोट में छुपा प्रेम, रंग गुलाल की बरसात और भक्तिभाव से सराबोर हो उठा पूरा बरसना

उत्तर प्रदेश के पवित्र ब्रज क्षेत्र में स्थित बरसाना में सोमवार को पारंपरिक लठामार होली का दिव्य और अनोखा नज़ारा देखने को मिला। सुबह से ही पूरे कस्बे में रंग, गुलाल और भक्ति से भरा उत्साह उमड़ पड़ा। राधा रानी के गांव बरसाना में लठामार होली सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अनोखा संगम है। यहाँ महिलाएँ—जिन्हें “ब्रज की गोपियाँ” कहा जाता है—पुरुषों पर प्रतीकात्मक लाठियाँ बरसाती हैं, जबकि पुरुष ढाल लेकर हास्य–मज़ाक के माहौल में बचाव करते हुए परंपरा निभाते हैं।
इस आयोजन को देखने के लिए देश–विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुँचे। करीब पूरे दिन राधा–कृष्ण की लीलाओं के जयकारों के बीच रंगों की बरसात होती रही। चौक, गलियाँ और मंदिर परिसर गुलाल से लाल–गुलाबी हो उठे। सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम के बीच स्थानीय प्रशासन ने पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया।
पास के मथुरा और वृंदावन में भी होली का माहौल चरम पर रहा। भक्तिमय गीतों, ढोलों और मंजीरों की धुनों ने पूरे ब्रज में अलौकिक वातावरण रचा, जो हर आने वाले के लिए अविस्मरणीय अनुभव बना रहा।

