कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और उत्पादन लागत में इजाफे का असर दवाओं पर, कई जरूरी साल्ट महंगे

दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। पैरासिटामॉल समेत कई जरूरी दवाओं के साल्ट महंगे हो गए हैं, जिससे फार्मास्यूटिकल कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ गई है और बाजार में दवाओं के दाम भी प्रभावित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट (API) और अन्य कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी इसके पीछे मुख्य कारण है। इसके अलावा पैकेजिंग, परिवहन और ऊर्जा लागत बढ़ने से भी दवा निर्माण महंगा हो गया है।
सबसे ज्यादा असर बुखार और दर्द में इस्तेमाल होने वाली दवा Paracetamol पर देखा जा रहा है। इसके अलावा कई एंटीबायोटिक और अन्य सामान्य दवाओं में इस्तेमाल होने वाले साल्ट की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
फार्मा इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर कच्चे माल की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले समय में दवाओं की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे आम मरीजों के इलाज का खर्च भी बढ़ सकता है।
हालांकि सरकार और संबंधित नियामक संस्थाएं दवाओं की कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि जरूरी दवाएं आम लोगों के लिए सुलभ बनी रहें।





