मजबूत आर्थिक गतिविधियों और बढ़ते निवेश के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था ने दर्ज की शानदार ग्रोथ, कई बड़े देशों को छोड़ा पीछे।

भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करते हुए वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 7.8% की GDP वृद्धि दर दर्ज की है। वहीं पूरे वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.7% रही, जो प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी बेहतर मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), निर्माण (कंस्ट्रक्शन), सेवा क्षेत्र और सरकारी पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी ने अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की। घरेलू मांग में सुधार और निवेश गतिविधियों में तेजी भी ग्रोथ के प्रमुख कारकों में शामिल रही।

सरकार का कहना है कि बुनियादी ढांचे पर लगातार निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और आर्थिक सुधारों की वजह से देश की विकास दर मजबूत बनी हुई है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितताओं और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है।
हालांकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई, वैश्विक बाजार की स्थिति और निर्यात क्षेत्र की चुनौतियों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। इसके बावजूद मौजूदा आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विकास क्षमता को दर्शाते हैं।

GDP वृद्धि दर के ये आंकड़े निवेशकों, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। इससे रोजगार सृजन, औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों को भी आगे बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।




