सीमा सुरक्षा को हाईटेक बनाने की तैयारी, निगरानी प्रणाली और तकनीकी उपकरणों से घुसपैठ व तस्करी पर लगेगी लगाम।

देश की सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार स्मार्ट बॉर्डर प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। योजना के तहत उन सीमाई क्षेत्रों में अत्याधुनिक निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा, जहां वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) तैनात हैं।
इस पहल का उद्देश्य सीमाओं पर एक लीक-प्रूफ सुरक्षा ग्रिड तैयार करना है, जिससे घुसपैठ, तस्करी, अवैध गतिविधियों और सीमा पार से होने वाली सुरक्षा चुनौतियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। इसके लिए आधुनिक सेंसर, स्मार्ट फेंसिंग, ड्रोन निगरानी, नाइट विजन कैमरे, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और रियल-टाइम डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, स्मार्ट बॉर्डर सिस्टम के जरिए सीमा पर होने वाली हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सकेगी। इससे सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ेगी और संवेदनशील इलाकों में निगरानी पहले से कहीं अधिक प्रभावी होगी।
सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित सुरक्षा ढांचे से मानव संसाधन पर निर्भरता कम होगी और सीमाई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था अधिक सटीक तथा मजबूत बनेगी। यह परियोजना विशेष रूप से उन इलाकों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पारंपरिक निगरानी चुनौतीपूर्ण रहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट बॉर्डर और एकीकृत सुरक्षा ग्रिड का निर्माण भारत की सीमा प्रबंधन रणनीति को नई मजबूती देगा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।




