पूर्वी कांगो में तेजी से फैल रहा इबोला, 127 लोगों की मौत; लैबों में जांच सामग्री की कमी और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा स्वास्थ्य तंत्र
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में इबोला संक्रमण के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 635 हो गई है, जबकि 127 लोगों की मौत हो चुकी है। यह प्रकोप मुख्य रूप से देश के पूर्वी प्रांतों इतुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू में फैल रहा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में दर्जनों नए मामले सामने आए हैं, जिससे संक्रमण के सामुदायिक स्तर पर तेजी से फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो में इबोला जोखिम स्तर को “बहुत उच्च” श्रेणी में रखा है।
हालात को और गंभीर बना रही है स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कांगो की तीन प्रमुख प्रयोगशालाओं में जांच के लिए आवश्यक रसायनों (रीएजेंट्स) की कमी के कारण इबोला परीक्षण प्रभावित हुआ है। इससे नए मामलों की पहचान और निगरानी में बाधा आ रही है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार फैला बुंडीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन और भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्यकर्मी सीमित संसाधनों के साथ मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जबकि संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी समस्याएं राहत कार्यों को प्रभावित कर रही हैं।
इबोला का असर बच्चों पर भी गंभीर रूप से देखा जा रहा है। हाल ही में एक अनाथालय में दो शिशुओं की मौत ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण, कम टीकाकरण और कमजोर स्वास्थ्य सेवाएं बच्चों को अधिक जोखिम में डाल रही हैं।
स्थानीय प्रशासन, WHO और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता अभियान, संपर्क ट्रेसिंग और उपचार केंद्रों के विस्तार पर काम कर रही हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त संसाधनों और सामुदायिक सहयोग के बिना इस महामारी को रोकना कठिन होगा।





