रिकॉर्ड हाई से 45% नीचे आई चांदी, निवेशकों में बढ़ी चिंता

चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 45% टूटने के बाद निवेशकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या चांदी के अच्छे दिन खत्म हो गए हैं या यह केवल एक अस्थायी करेक्शन है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स सिल्वर जनवरी 2026 के रिकॉर्ड स्तर से लगभग 44-45% नीचे आ चुका है।
भारत में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। कुछ महीने पहले जहां चांदी ₹3 लाख प्रति किलो के पार पहुंच गई थी, वहीं अब कई बाजारों में इसका भाव ₹2.33 लाख से ₹2.50 लाख प्रति किलो के दायरे में आ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे मजबूत डॉलर, बढ़ती बॉन्ड यील्ड

, मुनाफावसूली और निवेशकों की जोखिम लेने की बदलती रणनीति प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा कीमती धातुओं में हालिया बिकवाली ने भी दबाव बढ़ाया है।
हालांकि बाजार के जानकार मानते हैं कि चांदी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की मांग लगातार बनी हुई है। विश्व स्तर पर सप्लाई डेफिसिट भी चिंता का विषय बना हुआ है, जो लंबी अवधि में कीमतों को सहारा दे सकता है।
क्या ₹1.50 लाख प्रति किलो तक गिर सकती है चांदी?
तकनीकी रूप से यदि बिकवाली और बढ़ती है तो चांदी में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। हालांकि मौजूदा स्तरों से ₹1.50 लाख प्रति किलो तक गिरने के लिए लगभग 35-40% अतिरिक्त गिरावट की जरूरत होगी। कई विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी गिरावट तभी संभव है जब वैश्विक मांग में भारी कमी आए या निवेशकों का रुझान पूरी तरह बदल जाए।

वहीं दूसरी ओर कई संस्थानों और विश्लेषकों ने 2026 के लिए चांदी को लेकर अभी भी सकारात्मक अनुमान दिए हैं। कुछ अनुमानों में साल के दौरान कीमतें दोबारा ₹2.75 लाख से ₹3.5 लाख प्रति किलो के दायरे तक पहुंचने की संभावना जताई गई है, हालांकि उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निष्कर्ष
फिलहाल चांदी में बड़ी गिरावट ने निवेशकों को झटका जरूर दिया है, लेकिन औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति जैसे कारक लंबे समय में इसे सहारा दे सकते हैं। ऐसे में बाजार विशेषज्ञ जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय वैश्विक आर्थिक संकेतकों और मांग के रुझान पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।




