बिना विधायक बने मंत्री बने रहने पर उठे सवाल याचिका में नियुक्ति कोअसंवैधानिक घोषित करने की मांग

नई दिल्ली। बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति और मंत्री पद पर बने रहने को लेकर दायर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि दीपक प्रकाश की दोबारा नियुक्ति को असंवैधानिक और अवैध घोषित किया जाए, क्योंकि वे राज्य विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं।
याचिका में कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत कोई भी गैर-विधायक अधिकतम छह महीने तक मंत्री रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक होता है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि दीपक प्रकाश इस संवैधानिक प्रावधान की भावना के विपरीत मंत्री पद पर बने हुए हैं।

मामले में यह भी तर्क दिया गया है कि अप्रैल 2026 में बिहार में सरकार बदलने और मंत्रिपरिषद भंग होने के बाद दीपक प्रकाश को मई 2026 में फिर से मंत्री बनाया गया, जबकि वे अब भी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। याचिका में इसे संविधान की मंशा के खिलाफ बताते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह मामला केवल एक मंत्री की नियुक्ति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि कोई गैर-विधायक व्यक्ति कितनी बार मंत्री पद पर नियुक्त किया जा सकता है और संविधान के अनुच्छेद 164(4) की सीमा क्या है। इस सुनवाई पर बिहार की राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों की भी नजर बनी हुई है।




