सोशल मीडिया पर वायरल दावों के बीच अंतिम यात्रा को लेकर कई तरह की चर्चाएं, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार।

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई दुनिया की सबसे लंबी राजकीय अंतिम यात्राओं में से एक मानी जा रही है। ईरानी प्रशासन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, खामेनेई के पार्थिव शरीर को 131 दिन बाद सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम यात्रा छह दिनों तक चलेगी, पांच प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी और करीब 3000 किलोमीटर का सफर तय करेगी।
रिपोर्टों के मुताबिक अंतिम यात्रा की शुरुआत राजधानी तेहरान से होगी। इसके बाद विभिन्न धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले शहरों में जनाज़े को श्रद्धांजलि के लिए ले जाया जाएगा। हर शहर में सार्वजनिक दर्शन, नमाज़-ए-जनाज़ा और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा, ताकि देशभर के लोग अपने नेता को अंतिम विदाई दे सकें। अंत में खामेनेई को मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
ईरानी प्रशासन का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी वजह से सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्ग पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती, हवाई निगरानी और विशेष यातायात व्यवस्था लागू की गई है। कई विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और धार्मिक नेताओं के भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

खामेनेई की हत्या 28 फरवरी 2026 को हुए हमले में हुई थी, जिसकी पुष्टि बाद में ईरानी अधिकारियों ने की थी। इसके बाद देश में शोक की घोषणा की गई और अंतिम संस्कार को सुरक्षा व प्रशासनिक कारणों से टाल दिया गया। अब 131 दिन बाद होने वाली यह अंतिम यात्रा न केवल ईरान बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति के लिए भी अहम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतिम यात्रा केवल एक धार्मिक या राजकीय समारोह नहीं होगी, बल्कि नए नेतृत्व के दौर की औपचारिक शुरुआत का भी प्रतीक बनेगी। दुनिया भर की निगाहें इस आयोजन पर टिकी हैं, क्योंकि इसके राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की दिशा तय कर सकते हैं।






