मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के बीच संबंध को लेकर वर्षों से बहस चल रही है। विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस पर जानिए इस सवाल का वैज्ञानिक जवाब

हर साल 8 जून को World Brain Tumor Day मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य ब्रेन ट्यूमर के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इससे जूझ रहे मरीजों का समर्थन करना है। इस मौके पर एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक हुए अधिकांश वैज्ञानिक शोधों में मोबाइल फोन के उपयोग और ब्रेन ट्यूमर के बीच कोई स्पष्ट और ठोस संबंध साबित नहीं हुआ है। मोबाइल फोन रेडियोफ्रीक्वेंसी (RF) विकिरण उत्सर्जित करते हैं, जो नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन की श्रेणी में आता है। यह एक्स-रे या गामा किरणों की तरह डीएनए को सीधे नुकसान नहीं पहुंचाता।

हालांकि, कुछ अध्ययनों में लंबे समय तक और अत्यधिक मोबाइल उपयोग को लेकर सीमित चिंताएं जताई गई हैं, लेकिन इनके परिणाम एक समान नहीं रहे हैं। इसी वजह से स्वास्थ्य विशेषज्ञ एहतियात के तौर पर मोबाइल का संतुलित उपयोग करने की सलाह देते हैं।
ब्रेन ट्यूमर के पीछे आनुवंशिक कारण, उम्र, कुछ पर्यावरणीय कारक और पूर्व में रेडिएशन के संपर्क जैसे कारण अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वहीं, सिरदर्द, लगातार उल्टी, दृष्टि संबंधी समस्याएं, याददाश्त में कमी और दौरे पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल फोन का सामान्य उपयोग करने वाले लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। फिर भी, हैंड्स-फ्री डिवाइस का इस्तेमाल, कॉल की अवधि कम रखना और बच्चों में मोबाइल उपयोग सीमित करना बेहतर सावधानी मानी जाती है।

निष्कर्ष: वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाण यह साबित नहीं करते कि मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल सीधे तौर पर ब्रेन ट्यूमर का कारण बनता है। फिर भी, स्वस्थ जीवनशैली और तकनीक का संतुलित उपयोग हमेशा फायदेमंद रहता है।




