सरकार ने इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए उठाया कदम, तेल आयात पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा फोकस

कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने E22 से E30 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को शून्य करने का फैसला किया है। इस निर्णय का उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाना, विदेशी तेल आयात पर निर्भरता कम करना और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
क्या है E22 और E30 पेट्रोल?
E22 और E30 में ‘E’ का अर्थ इथेनॉल (Ethanol) है। E22 पेट्रोल में 22% इथेनॉल और 78% पेट्रोल होता है, जबकि E30 में 30% इथेनॉल और 70% पेट्रोल का मिश्रण होता है। वर्तमान में भारत में E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) को बढ़ावा दिया जा रहा है और अब इससे आगे बढ़ने की दिशा में कदम उठाया गया है।
एक्साइज ड्यूटी शून्य होने का क्या मतलब है?
एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार द्वारा ईंधन पर लगाया जाने वाला कर है। E22 से E30 मिश्रित पेट्रोल पर इसे शून्य करने का मतलब है कि ऐसे ईंधन के उत्पादन और बिक्री को कर राहत मिलेगी। इससे तेल कंपनियों को इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और भविष्य में उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिल सकता है।
सरकार को इससे क्या फायदा होगा?
- कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम होगा।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल का उपयोग बढ़ेगा।
- गन्ना किसानों और कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना बढ़ेगी।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े स्तर पर इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग बढ़ता है, तो लंबे समय में ईंधन आपूर्ति अधिक स्थिर हो सकती है। हालांकि पेट्रोल की खुदरा कीमतों पर इसका सीधा और तत्काल प्रभाव कई अन्य कारकों जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों, कर संरचना और तेल विपणन कंपनियों की नीतियों पर भी निर्भर करेगा।

पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
इथेनॉल को पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है। अधिक इथेनॉल मिश्रण से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से दुनिया के कई देश जैव-ईंधन (Biofuel) के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।
निष्कर्ष
E22 से E30 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य करने का फैसला केवल कर राहत नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह कदम देश के ईंधन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।






