केप वर्डे, मोरक्को, ईरान और न्यूजीलैंड जैसी टीमों ने दिग्गजों को रोका, 48 टीमों वाले नए फॉर्मेट ने विश्व कप को बनाया और ज्यादा रोमांचक व प्रतिस्पर्धी

FIFA World Cup 2026 में पहली बार 48 टीमों वाला नया फॉर्मेट लागू किया गया है। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि ज्यादा टीमों के आने से मुकाबलों का स्तर गिर सकता है। लेकिन शुरुआती मैचों ने इन सभी आशंकाओं को गलत साबित कर दिया है।
विश्व कप में कई छोटे और अपेक्षाकृत कमज़ोर मानी जाने वाली टीमों ने बड़ी फुटबॉल ताकतों को कड़ी चुनौती दी है। केप वर्डे ने स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोका, जबकि न्यूजीलैंड और मिस्र जैसी टीमों ने भी मजबूत विरोधियों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। मोरक्को ने ब्राज़ील के खिलाफ ड्रॉ खेलकर अपनी क्षमता का परिचय दिया।
ईरान ने बेल्जियम को ड्रॉ पर रोक दिया, वहीं कनाडा, स्कॉटलैंड और दक्षिण कोरिया जैसी टीमों ने भी साबित किया कि अब विश्व कप केवल पारंपरिक दिग्गजों का मंच नहीं रह गया है। छोटे देशों की इस चुनौती ने टूर्नामेंट को पहले से कहीं अधिक रोमांचक और अनिश्चित बना दिया है।

फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि 48 टीमों के विस्तार से अधिक देशों को विश्व मंच मिला है, जिससे नए बाजार, नए प्रशंसक और नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। यही कारण है कि अब विश्व कप में हर मैच महत्वपूर्ण और अप्रत्याशित दिखाई दे रहा है।
कुल मिलाकर, शुरुआती संकेत बताते हैं कि FIFA का 48 टीमों वाला प्रयोग सफल होता नजर आ रहा है और इसने विश्व कप की कहानी को एक नया आयाम दे दिया है।



