अदाणी समूह ने ऊर्जा क्षेत्र में भविष्य की रणनीति की स्पष्ट की रूपरेखा, स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा उत्पादन पर रहेगा विशेष फोकस

भारत के प्रमुख उद्योगपति और Gautam Adani के नेतृत्व वाले Adani Group ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा दांव खेलते हुए वर्ष 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य घोषित किया है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर जोर दे रहा है।
गौतम अदाणी ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि और औद्योगिक विस्तार के लिए ऊर्जा क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। देश को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने के लिए स्थिर, सुरक्षित और स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अदाणी समूह परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश की योजना पर काम कर रहा है।
अदाणी समूह पहले से ही सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन और ट्रांसमिशन नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश कर चुका है। अब परमाणु ऊर्जा को अपनी भविष्य की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाकर समूह ऊर्जा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु ऊर्जा कम कार्बन उत्सर्जन के साथ बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का एक प्रभावी विकल्प है, जो भारत के ऊर्जा संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर हासिल किया जाता है तो यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। इससे न केवल देश की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी बल्कि जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही, स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति और मजबूत हो सकती है।

अदाणी समूह का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार भी ऊर्जा सुरक्षा और नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। आने वाले वर्षों में सरकारी नीतियों, तकनीकी साझेदारियों और निवेश योजनाओं के आधार पर यह परियोजना भारत के ऊर्जा परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला सकती है।
उद्योग जगत का मानना है कि 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य केवल एक कारोबारी विस्तार नहीं बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।






