बारिश की भारी कमी से धान, सोयाबीन और कपास की बुवाई प्रभावित; सरकार ने राज्यों को आकस्मिक कृषि योजना लागू करने के निर्देश दिए।

देश में कमजोर मानसून और बारिश की भारी कमी का असर अब खरीफ फसलों की बुवाई पर साफ दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में सामान्य की तुलना में बुवाई में 85 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह तक सामान्य से काफी कम वर्षा होने के कारण किसान बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

सबसे अधिक असर सोयाबीन, कपास, धान, दालों और मक्का जैसी खरीफ फसलों पर पड़ा है। कई जिलों में खेत तैयार होने के बावजूद पर्याप्त नमी नहीं होने से किसान इंतजार कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित होने के साथ-साथ किसानों की लागत भी बढ़ सकती है।
कमजोर मानसून को देखते हुए केंद्र सरकार ने संभावित सूखे से प्रभावित 315 जिलों के लिए आकस्मिक कृषि योजनाएं तैयार की हैं। राज्यों को वैकल्पिक फसलें अपनाने, जल संरक्षण बढ़ाने और किसानों को समय-समय पर मौसम आधारित सलाह देने के निर्देश दिए गए हैं।

महाराष्ट्र के कई जिलों में प्रशासन ने किसानों को पर्याप्त वर्षा होने तक बुवाई टालने की सलाह दी है। कृषि विभाग ने कहा है कि कम से कम 100 मिमी बारिश होने के बाद ही बुवाई करना सुरक्षित रहेगा, ताकि फसल खराब होने का जोखिम कम हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में यदि मानसून सक्रिय होता है तो खरीफ सीजन की स्थिति में सुधार संभव है। हालांकि बारिश में और देरी होने पर उत्पादन, किसानों की आय और खाद्य कीमतों पर व्यापक असर पड़ सकता है।






