डार्क चॉकलेट को माना बेहतर, लेकिन मात्रा का रखें खास ध्यान

हर साल 7 जुलाई को विश्व चॉकलेट दिवस मनाया जाता है। चॉकलेट का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सही प्रकार की चॉकलेट सीमित मात्रा में खाने पर दिल और दिमाग की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सभी चॉकलेट एक जैसी नहीं होतीं और इनके पोषण संबंधी प्रभाव में बड़ा अंतर होता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट सामान्य मिल्क चॉकलेट की तुलना में बेहतर विकल्प मानी जाती है। खासतौर पर 70 प्रतिशत या उससे अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट में फ्लैवनॉल जैसे पौध-आधारित यौगिक पाए जाते हैं। ये यौगिक रक्त वाहिकाओं के सामान्य कार्य और रक्त प्रवाह से जुड़े संभावित लाभों के लिए अध्ययन किए गए हैं।
दिल की सेहत के संदर्भ में डार्क चॉकलेट का सीमित सेवन बेहतर रक्त प्रवाह और रक्तचाप पर मामूली सकारात्मक प्रभाव से जुड़ा हो सकता है। वहीं दिमाग के लिए बेहतर रक्त संचार, मूड और संज्ञानात्मक कार्यों से जुड़े संभावित लाभों पर भी शोध हुआ है। हालांकि, इसे किसी बीमारी की दवा या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

मिल्क चॉकलेट और व्हाइट चॉकलेट में आमतौर पर चीनी और वसा की मात्रा अधिक हो सकती है, जबकि कोको ठोस पदार्थ अपेक्षाकृत कम होते हैं। इसलिए नियमित सेवन के लिए ऐसी चॉकलेट चुनना बेहतर माना जाता है जिसमें कोको की मात्रा अधिक और अतिरिक्त चीनी कम हो।
एक्सपर्ट्स की अहम सलाह है कि डार्क चॉकलेट भी सीमित मात्रा में ही खाएं, क्योंकि इसमें कैलोरी और वसा होती है। लगभग 10 से 20 ग्राम की छोटी मात्रा पर्याप्त मानी जा सकती है। पैकेट खरीदते समय लेबल जरूर पढ़ें और कम अतिरिक्त चीनी वाला विकल्प चुनें।
विश्व चॉकलेट दिवस पर संदेश साफ है—स्वाद के साथ सेहत का ध्यान रखना है तो अधिक कोको और कम चीनी वाली डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प हो सकती है, लेकिन संयम सबसे जरूरी है।





