25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाने वाली देवशयनी एकादशी इस वर्ष 25 जुलाई 2026 (शनिवार) को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत होती है, जो देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी तक चलता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य पारंपरिक रूप से नहीं किए जाते, जबकि पूजा-पाठ, जप, तप और दान का विशेष महत्व माना जाता है।
देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
पूजा के नियम
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ एवं पीले वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान को पीले पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत, फल और प्रसाद अर्पित करें।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- श्रद्धानुसार निर्जल, फलाहार या सात्विक व्रत रखें।
- गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं दान देना शुभ माना जाता है।
किन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन, क्रोध, असत्य, नशा और अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए। चातुर्मास के दौरान सात्विक जीवन, संयम और नियमित पूजा-पाठ का विशेष महत्व बताया गया है।

पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जुलाई को प्रारंभ होकर 25 जुलाई तक रहेगी, लेकिन उदयातिथि के आधार पर व्रत और पूजा 25 जुलाई को की जाएगी। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय के अनुसार किया जाता है।






