खरगे बोले- छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिश लोकतंत्र के खिलाफ।

देशभर में चल रहे CJP (Cockroach Janta Party) के छात्र आंदोलन के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) द्वारा छात्रों को विरोध-प्रदर्शन से दूर रहने की एडवाइजरी जारी किए जाने पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया है।
खरगे ने कहा कि विश्वविद्यालयों का काम छात्रों को सोचने, सवाल पूछने और अपनी बात रखने का अवसर देना है, न कि उन्हें डराकर विरोध-प्रदर्शनों से दूर रखना। उनके मुताबिक, यदि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से रोका जाता है, तो यह लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शैक्षणिक संस्थानों पर दबाव बनाकर असहमति की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, पहले दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके बाद JNU प्रशासन ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए एडवाइजरी जारी की। इसमें जंतर-मंतर पर आयोजित CJP से जुड़े प्रदर्शन में शामिल न होने की सलाह दी गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी कहा कि एडवाइजरी का उल्लंघन करने पर कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही सोशल मीडिया पर भी जिम्मेदारी से व्यवहार करने की हिदायत दी गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें डराने का रास्ता अपना रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संवाद होना चाहिए, लेकिन इसके स्थान पर विरोध करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है। खरगे ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक बताया।
वहीं, विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी विश्वविद्यालयों की एडवाइजरी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का संवैधानिक अधिकार है और किसी भी संस्थान को उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित नहीं करनी चाहिए। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह एडवाइजरी छात्रों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जारी की गई है।
गौरतलब है कि CJP की ओर से 24 जुलाई को देशभर में विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। आंदोलन का मुख्य मुद्दा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार बताया जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित किए गए, जिनको लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई।

अब इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग ले लिया है। एक ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहा है, तो दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि एडवाइजरी केवल एहतियात और सुरक्षा के मद्देनज़र जारी की गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और अधिक गर्माने की संभावना जताई जा रही है।






