Microplastics को लेकर चिंता, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक हर प्लास्टिक बोतल खतरनाक नहीं

प्लास्टिक की बोतल से पानी पीने को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इससे सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। खासकर लंबे समय तक प्लास्टिक में रखे पानी और माइक्रोप्लास्टिक्स को लेकर वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता सामने आती रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक बोतलबंद और नल के पानी में माइक्रोप्लास्टिक्स पाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध सीमित वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर WHO ने कहा है कि मौजूदा स्तर पर पेयजल में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक्स से मानव स्वास्थ्य को नुकसान का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन इस विषय पर और रिसर्च की जरूरत है।

अमेरिकी FDA भी कहता है कि बोतलबंद पानी में माइक्रो और नैनोप्लास्टिक्स पाए गए हैं, लेकिन अभी उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह साबित नहीं करते कि पानी में पाए जाने वाले इन कणों के मौजूदा स्तर से मानव स्वास्थ्य को खतरा है।

विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि पानी के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली, दोबारा इस्तेमाल के लिए बनी बोतल का इस्तेमाल किया जाए। प्लास्टिक की बोतल को लंबे समय तक धूप या अत्यधिक गर्मी में रखने और डिस्पोजेबल बोतल को बार-बार इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है। रोजमर्रा के इस्तेमाल में स्टील या कांच की बोतल एक व्यावहारिक विकल्प हो सकती है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि प्लास्टिक की हर बोतल से पानी पीना खतरनाक है, लेकिन लंबे समय के लिए प्लास्टिक पर निर्भरता कम करना बेहतर विकल्प माना जाता है।






