15 जून को मनाई जाएगी सोमवती अमावस्या, शिव-पार्वती पूजा, स्नान-दान और पितृ तर्पण का मिलेगा विशेष फल

हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन इस बार की सोमवती अमावस्या कई दुर्लभ संयोगों के कारण और भी खास हो गई है। वर्ष 2026 में सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 14 जून दोपहर से शुरू होकर 15 जून सुबह तक रहेगी और उदया तिथि के अनुसार इसका पर्व 15 जून को मान्य होगा।
🌟 क्यों खास है इस बार की सोमवती अमावस्या?
इस बार सोमवती अमावस्या पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। यह अमावस्या अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन शिव-पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। कुछ पंचांगों के अनुसार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ योग भी बन रहे हैं।

⏰ शुभ मुहूर्त
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 14 जून 2026, दोपहर 12:20 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 15 जून 2026, सुबह 8:24 बजे
- मुख्य पर्व: 15 जून 2026 (सोमवार)
- स्नान-दान का शुभ समय: ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय तक विशेष शुभ माना गया है।
🕉️ पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें।
- पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करें।
- पीपल वृक्ष की पूजा कर परिक्रमा करें।
- गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं धन का दान करें।
🙏 धार्मिक महत्व
मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर व्रत, जप, तप, स्नान और दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। वहीं पितृ तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलने की मान्यता है।

🚫 क्या न करें?
- अमावस्या के दिन क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें।
- तामसिक भोजन और नशे का सेवन न करें।
- किसी का अपमान या अनादर करने से बचें।
- धार्मिक कार्यों में लापरवाही न बरतें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में पड़ रही यह सोमवती अमावस्या आध्यात्मिक उन्नति, पितृ कृपा और शिव कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर मानी जा रही है।




