कपिल सिब्बल ने दलबदल पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधि बार-बार पार्टी बदल सकते हैं, तो चुनाव के महत्व पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने देश में लगातार बढ़ रही दल-बदल की राजनीति को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर निर्वाचित जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद बार-बार अपनी पार्टी बदल सकते हैं, तो फिर चुनाव कराने का औचित्य क्या रह जाता है।

कपिल सिब्बल ने कहा कि जनता किसी उम्मीदवार को उसके राजनीतिक दल, विचारधारा और चुनावी वादों के आधार पर वोट देती है। लेकिन जब वही जनप्रतिनिधि चुनाव के बाद किसी अन्य दल में शामिल हो जाता है, तो मतदाताओं के विश्वास को ठेस पहुंचती है। उन्होंने दलबदल विरोधी कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सिब्बल ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि जनता के जनादेश का सम्मान किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई विधायक या सांसद पार्टी बदलता है, तो उसे दोबारा जनता के बीच जाकर नया जनादेश लेना चाहिए।

हाल के वर्षों में कई राज्यों में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दलबदल की घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। सिब्बल की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में राजनीतिक दलों के बीच नेताओं के आने-जाने का सिलसिला लगातार चर्चा में बना हुआ है।




