बोले- सरकार को झुकना पड़ा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला देशभर में NEET और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच आया है। अपने इस्तीफे में प्रधान ने कहा कि उन्होंने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए और मौजूदा विवाद का राजनीतिक या अन्य दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।
इस्तीफे के बाद आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “वे कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” दीपके ने इसे छात्रों और युवाओं की एक बड़ी लोकतांत्रिक जीत बताया और कहा कि लगातार शांतिपूर्ण संघर्ष के कारण सरकार को आखिरकार फैसला बदलना पड़ा।
हालांकि दीपके ने स्पष्ट किया कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उनके अनुसार, इस्तीफा केवल पहली मांग थी और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा छात्रों के हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को अभी और फैसले लेने होंगे। उन्होंने कहा कि जब तक सभी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के पत्र में लिखा कि देश के युवाओं की आकांक्षाएं सर्वोपरि हैं और वे नहीं चाहते कि परीक्षा विवाद के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित हो। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रहित और छात्रों के हित को ध्यान में रखकर उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है।

राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को केंद्र सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। विपक्ष ने इसे छात्र आंदोलन की जीत बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि छात्रों के हित सर्वोच्च हैं और परीक्षा प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया जारी रहेगी। इस बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार नया शिक्षा मंत्री किसे बनाती है और परीक्षा सुधारों को लेकर आगे क्या कदम उठाती है।






