उच्च आय वर्ग के टैक्सपेयर्स तेजी से बढ़े, बेहतर टैक्स अनुपालन और आय में वृद्धि को माना जा रहा प्रमुख कारण

देश में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले आयकरदाताओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों के दौरान करीब 300 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आयकर विभाग के आंकड़ों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह बढ़ोतरी भारत में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, उच्च आय वर्ग के विस्तार और बेहतर टैक्स अनुपालन का संकेत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल टैक्स सिस्टम, डेटा एनालिटिक्स और आयकर विभाग की ‘नज’ (Nudge) पहल के चलते स्वैच्छिक कर अनुपालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। विभाग लगातार ऐसे करदाताओं से संपर्क कर रहा है जिनकी आय और कर विवरण में अंतर पाया जाता है, जिससे अधिक लोग सही आय घोषित कर रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, केवल एक वर्ष में ही 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि उच्च आय वर्ग का दायरा लगातार बढ़ रहा है और प्रत्यक्ष कर संग्रह में भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है।

सरकार का कहना है कि तकनीक आधारित निगरानी, ई-फाइलिंग व्यवस्था और पारदर्शी कर प्रणाली के कारण टैक्स बेस मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी उच्च आय वर्ग के करदाताओं की संख्या में वृद्धि जारी रह सकती है, जिससे प्रत्यक्ष कर संग्रह और सरकारी राजस्व को मजबूती मिलेगी।






