मिसाइलों में पानी भरने और युद्ध अनुभव की कमी जैसे दावों के बीच PLA की ताकत पर नई बहस

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपनी स्थापना के 99 वर्ष पूरे कर लिए हैं। दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकतों में गिनी जाने वाली PLA के पास आधुनिक मिसाइलें, नौसेना, वायुसेना और साइबर युद्ध क्षमता है। हालांकि, हाल के वर्षों में इसकी वास्तविक युद्ध क्षमता को लेकर कई सवाल भी उठे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कुछ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से पहले ऐसे दावे सामने आए थे कि चीन की कुछ मिसाइल साइलो में ईंधन की जगह पानी भरा मिला और रक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार ने सैन्य तैयारियों को प्रभावित किया। हालांकि, इन दावों की चीन ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और कई आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित भी नहीं हो सके हैं।

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि PLA ने पिछले दो दशकों में अत्याधुनिक हथियार, हाइपरसोनिक मिसाइलें, विमानवाहक पोत, स्टील्थ फाइटर जेट और ड्रोन तकनीक में भारी निवेश किया है। लेकिन एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि चीन की सेना ने 1979 के चीन-वियतनाम युद्ध के बाद कोई बड़ा वास्तविक युद्ध नहीं लड़ा, इसलिए उसके कई आधुनिक हथियार बड़े पैमाने के युद्ध में “वॉर-टेस्टेड” नहीं माने जाते।

विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी आधुनिकीकरण के बावजूद किसी भी सेना की वास्तविक क्षमता का आकलन केवल उपकरणों से नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, नेतृत्व, रसद और वास्तविक युद्ध अनुभव से भी होता है। यही कारण है कि PLA को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी ताकत और वास्तविक युद्धक क्षमता पर लगातार चर्चा होती रहती है।






