लगातार स्क्रीन इस्तेमाल से फोकस, नींद और मानसिक सक्रियता पर पड़ सकता है असर

आज के समय में मोबाइल फोन और इंटरनेट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई, काम, मनोरंजन, सोशल मीडिया और खरीदारी तक के लिए लोग घंटों स्मार्टफोन पर निर्भर रहते हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा और लगातार मोबाइल इस्तेमाल को लेकर विशेषज्ञ और शोधकर्ता इसके मानसिक और संज्ञानात्मक प्रभावों पर चिंता जता रहे हैं। हालिया शोधों में अत्यधिक स्मार्टफोन उपयोग और ध्यान, आत्म-नियंत्रण तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बीच संबंध पाया गया है।
मोबाइल पर लगातार नोटिफिकेशन, शॉर्ट वीडियो, सोशल मीडिया और तेजी से बदलती जानकारी दिमाग को बार-बार अपना ध्यान बदलने के लिए मजबूर करती है। इससे लंबे समय तक किसी एक काम पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में कॉलेज छात्रों के बीच मोबाइल फोन की लत और कम learning engagement तथा ज्यादा academic burnout के बीच महत्वपूर्ण संबंध पाया गया।

इसका असर सिर्फ पढ़ाई या काम तक सीमित नहीं है। अत्यधिक स्क्रीन इस्तेमाल नींद के पैटर्न को भी प्रभावित कर सकता है। मोबाइल का देर रात तक इस्तेमाल करने से सोने का समय आगे बढ़ सकता है, जिससे अगले दिन थकान और एकाग्रता में कमी महसूस हो सकती है।

दिलचस्प बात यह है कि मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल कम करने से कुछ सकारात्मक बदलाव भी देखे गए हैं। एक प्रयोग में दो सप्ताह तक मोबाइल इंटरनेट ब्लॉक करने वाले प्रतिभागियों में स्मार्टफोन उपयोग कम होने के साथ sustained attention और subjective well-being में सुधार दर्ज किया गया।
इसलिए मोबाइल को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना, बिना जरूरत नोटिफिकेशन बंद रखना, सोने से पहले फोन दूर रखना और नियमित रूप से बिना स्क्रीन के समय बिताना दिमाग के लिए बेहतर आदत हो सकती है।






