लो-कार्बन केमिकल सेक्टर में अदाणी की एंट्री, दूसरी ओर RHFL मामले में जांच एजेंसी की बड़ी कार्रवाई

देश के कारोबारी जगत से दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक तरफ अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने फ्रांस की क्लीन-टेक कंपनी Dioxycle के साथ भारत में लो-कार्बन केमिकल उत्पादन विकसित करने के लिए दीर्घकालिक साझेदारी की है। दूसरी तरफ केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) से जुड़े 3,500 करोड़ रुपये से अधिक की कथित बैंक हानि के मामले में अपना पहला आरोपपत्र दाखिल किया है।
अदाणी एंटरप्राइजेज और फ्रांस की Dioxycle के बीच हुई साझेदारी का उद्देश्य भारत में कम कार्बन उत्सर्जन वाले रसायनों का उत्पादन विकसित करना और उसे बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाना है। इस साझेदारी को अदाणी समूह की लो-कार्बन केमिकल सेक्टर में एंट्री के रूप में देखा जा रहा है। योजना के तहत शुरुआत एक पायलट परियोजना से की जाएगी, जिसमें कैप्चर किए गए कार्बन डाइऑक्साइड और नवीकरणीय बिजली का इस्तेमाल कर उपयोगी औद्योगिक रसायन तैयार किए जाएंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती परियोजना में फॉर्मिक एसिड के उत्पादन पर काम किया जाएगा। इस रसायन का इस्तेमाल टेक्सटाइल, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग समेत कई उद्योगों में होता है। यदि पायलट परियोजना सफल रहती है तो तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर विस्तारित किया जा सकता है। इस पहल का व्यापक उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को केवल अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय उसे स्वच्छ ऊर्जा की मदद से उपयोगी औद्योगिक उत्पादों में बदलना है।
इसी बीच कारोबारी जगत की दूसरी बड़ी खबर RHFL से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले से सामने आई है। CBI ने 3,500 करोड़ रुपये से अधिक की कथित हानि से संबंधित मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उधार लिए गए धन को कथित तौर पर मध्यस्थ संस्थाओं के जरिए अन्य कंपनियों तक पहुंचाया गया, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भारी नुकसान हुआ। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये CBI के आरोप हैं और अदालत में दोष सिद्ध होना बाकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपपत्र में RHFL और उसके कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों समेत कई पक्षों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी ने कथित आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप लगाए हैं। CBI का कहना है कि संबंधित मामलों की जांच व्यापक स्तर पर जारी है।
कारोबारी दृष्टि से देखें तो ये दोनों घटनाक्रम अलग-अलग क्षेत्रों की बड़ी तस्वीर पेश करते हैं। अदाणी एंटरप्राइजेज की फ्रांसीसी कंपनी के साथ साझेदारी भारत में क्लीन-टेक और लो-कार्बन उद्योग की बढ़ती संभावनाओं को दिखाती है, जबकि RHFL से जुड़ा मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस, बैंकिंग जोखिम और वित्तीय जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवालों को सामने लाता है।






