सीमित हॉस्टल, बढ़ता खर्च और छात्रों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में स्नातक दाखिला प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही हजारों छात्रों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती रहने की व्यवस्था बन गई है। विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों में हॉस्टल की सीटें बेहद सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को महंगे पीजी (PG) और किराये के कमरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, डीयू के केवल लगभग 20 कॉलेजों में ही हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध है। कुल मिलाकर करीब 4300 हॉस्टल सीटें हैं, जबकि हर साल विश्वविद्यालय में लगभग 71 हजार स्नातक सीटों पर दाखिले होते हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र दूसरे राज्यों से दिल्ली पढ़ने आते हैं, लेकिन सीमित हॉस्टल क्षमता के कारण केवल दो से तीन प्रतिशत विद्यार्थियों को ही कैंपस में रहने का अवसर मिल पाता है।
पहले राउंड के एडमिशन के बाद नॉर्थ कैंपस और साउथ कैंपस के आसपास पीजी और किराये के कमरों की मांग अचानक बढ़ गई है। इसका असर किराए पर भी दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में अच्छे पीजी का मासिक किराया 15 हजार रुपये या उससे अधिक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बताया जा रहा है। इसके अलावा बिजली, भोजन, सुरक्षा जमा (Security Deposit) और अन्य खर्च जोड़ने पर छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ जाता है।
मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम कॉलेज, दौलत राम कॉलेज और दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज सहित कई संस्थानों ने हॉस्टल आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकांश कॉलेजों ने स्पष्ट किया है कि हॉस्टल आवंटन मेरिट, पात्रता और निर्धारित नियमों के आधार पर किया जाएगा। कुछ कॉलेजों में बाहरी राज्यों के छात्रों को प्राथमिकता भी दी जा रही है, लेकिन सीटों की संख्या सीमित होने के कारण प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी है।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि दिल्ली जैसे महानगर में निजी आवास का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए पढ़ाई के साथ रहने का खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है। कई छात्र हॉस्टल न मिलने पर कॉलेज से दूर सस्ते इलाकों में रहने को मजबूर हैं, जिससे रोजाना आने-जाने में समय और अतिरिक्त खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में डीयू में छात्र संख्या के अनुरूप हॉस्टल क्षमता नहीं बढ़ाई गई, तो हर वर्ष नए छात्रों को इसी तरह आवास संकट का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में विश्वविद्यालय के सामने हॉस्टल विस्तार और किफायती छात्र आवास उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।






