15 Best News Portal Development Company In India

The Bonus Market Update: लगातार पांचवें दिन लुढ़का शेयर बाजार, सेंसेक्स 332 अंक टूटा; निफ्टी 23,800 के नीचे बंद

SHARE:

कच्चे तेल की महंगाई और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव।

 

 

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 332.08 अंक (0.43%) टूटकर 76,059.77 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 102.15 अंक फिसलकर 23,767.45 के स्तर पर आ गया। इसके साथ ही निफ्टी एक बार फिर 23,800 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में लगातार गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर महंगाई, कंपनियों की लागत और निवेशकों की धारणा पर पड़ता है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा।

कारोबार के दौरान लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। रियल्टी सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जिसमें करीब 1.5% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, मेटल, ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि, एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और सीमित बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया।

सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फाइनेंस और इटरनल (पूर्व में ज़ोमैटो) के शेयरों में लगभग 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। कई दिग्गज बैंकिंग और ऑटो शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। दूसरी ओर, कुछ रक्षात्मक (Defensive) शेयरों में हल्की खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला।

विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की सतर्क रणनीति के कारण निवेशकों का रुझान फिलहाल जोखिम वाले निवेश से दूर बना हुआ है। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, वैश्विक बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

लगातार पांच दिनों की इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और विदेशी निवेशकों की खरीदारी वापस नहीं लौटती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

Lokseva Bureau
Author: Lokseva Bureau

Leave a Comment