अमेरिकी फैसले से भारतीय निर्यातकों को राहत

अमेरिका द्वारा जबरन श्रम (Forced Labor) को आधार बनाकर लागू किए गए नए टैरिफ नियमों के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। केंद्र सरकार के अनुसार, भारत के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा केवल 10 फीसदी टैरिफ के दायरे में रहेगा। यह भारत के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है, क्योंकि कई अन्य देशों पर इससे अधिक शुल्क लागू किया गया है।
सरकार का कहना है कि भारत को अमेरिका की नई टैरिफ व्यवस्था में अपेक्षाकृत निचले शुल्क वर्ग में रखा गया है। इससे भारतीय उद्योगों, विशेष रूप से इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, रसायन, कृषि उत्पाद और अन्य निर्यात क्षेत्रों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की संभावना है। हालांकि कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क का असर बना रहेगा, लेकिन कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा कम टैरिफ श्रेणी में आने से व्यापार पर दबाव सीमित रहने की उम्मीद है।
अमेरिका ने इन शुल्कों को लागू करने के पीछे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम के इस्तेमाल को रोकने का तर्क दिया है। यह नई व्यवस्था सेक्शन 301 के तहत लागू की गई है और कई व्यापारिक साझेदार देशों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। इसी बीच अमेरिका में इन टैरिफों को चुनौती देते हुए दो छोटे व्यवसायों ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को मिली यह राहत भारतीय निर्यातकों के लिए सकारात्मक संकेत है। यदि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताएं आगे बढ़ती हैं, तो भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं। वहीं भारतीय उद्योग अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि किन उत्पादों पर आगे और रियायतें मिल सकती हैं तथा कौन से क्षेत्र अतिरिक्त शुल्क से प्रभावित रहेंगे।

हालांकि वैश्विक व्यापार पर इन टैरिफों का असर बना रहेगा, लेकिन भारत के लिए मौजूदा निर्णय को एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि वह अमेरिका के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है ताकि भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा की जा सके और व्यापारिक अवसरों का विस्तार हो।






