तीन महीने में करीब 40% बढ़े दाम, सरकार ने एथेनॉल को जिम्मेदार मानने से किया इनकार

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने त्योहारों से पहले आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई बाजारों में चीनी का खुदरा भाव करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कीमतों में तेज बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में ऐसी स्थिति क्यों बनी। खड़गे के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में चीनी करीब 40 प्रतिशत तक महंगी हुई है।

खड़गे ने सरकार से चीनी के घटते स्टॉक, आयात और एथेनॉल नीति को लेकर सवाल किए। उन्होंने कहा कि भारत में चीनी का भंडार करीब नौ साल के निचले स्तर पर पहुंचने के साथ सरकार को 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब देश आत्मनिर्भरता की बात करता है, तो चीनी की घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए आयात की नौबत क्यों आई।

हालांकि, केंद्र सरकार ने चीनी की महंगाई के लिए एथेनॉल उत्पादन को मुख्य वजह मानने से इनकार किया है। सरकार के अनुसार इस साल चीनी उत्पादन में अनुमानित करीब 11 प्रतिशत गिरावट आई है, जिसका प्रमुख कारण खराब मौसम और गन्ने की पैदावार में कमी है। सरकार ने यह भी कहा है कि एथेनॉल उत्पादन के कारण चीनी की उपलब्धता में ऐसी कमी नहीं आई, जिससे मौजूदा तेजी को पूरी तरह उससे जोड़ा जा सके।
सरकार के मुताबिक, त्योहारों से पहले मांग बढ़ना, घरेलू उत्पादन में कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का दबाव भी चीनी महंगी होने के कारणों में शामिल हैं। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट जैसे कदम भी उठाए हैं।






