कोर्ट ने कहा- यूनिफॉर्म समानता और धर्मनिरपेक्षता के लिए जरूरी, स्कूल ड्रेस कोड का पालन करना होगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति से जुड़ी एक नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित यूनिफॉर्म का उद्देश्य सभी विद्यार्थियों के बीच समानता बनाए रखना है। कोर्ट के अनुसार, स्कूल का ड्रेस कोड विद्यार्थियों के बीच धार्मिक या अन्य पहचान के आधार पर अलगाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मामला एक नाबालिग छात्रा से जुड़ा था, जिसने स्कूल में हिजाब पहनकर आने की अनुमति देने की मांग की थी। छात्रा की ओर से दलील दी गई कि हिजाब पहनना उसकी धार्मिक मान्यता से जुड़ा विषय है। याचिका में स्कूल के ड्रेस कोड से संबंधित निर्देश को चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्कूलों में निर्धारित यूनिफॉर्म के महत्व पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए समान ड्रेस कोड शैक्षणिक वातावरण में समानता और अनुशासन बनाए रखने का माध्यम है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को संस्थान के निर्धारित नियमों और ड्रेस कोड का पालन करना होता है।
अदालत ने धर्मनिरपेक्ष शैक्षणिक वातावरण के संदर्भ में भी यूनिफॉर्म की भूमिका पर टिप्पणी की। कोर्ट के अनुसार, शिक्षण संस्थानों में सभी विद्यार्थियों के लिए समान नियम लागू होना जरूरी है, ताकि किसी विशेष धार्मिक पहचान के आधार पर अलग व्यवस्था की मांग न हो।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद स्कूलों में धार्मिक पहनावे और निर्धारित यूनिफॉर्म को लेकर बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हालांकि, इस मामले में अदालत का निर्णय संबंधित याचिका और उसके तथ्यों के आधार पर है। स्कूलों में ड्रेस कोड और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर कानूनी स्थिति भी अलग हो सकती है।






