नन्हे हाथों में मजबूरी, लंच पैकेट के लिए छीना-झपटी
बेहोश हुई महिला, तीसरे दिन भी जल चुके सामान को समेट रहे परिवार

लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद तीसरे दिन भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। आग ने जहां सैकड़ों लोगों के आशियाने छीन लिए, वहीं अब जिंदगी की जंग सड़क पर उतर आई है। राहत सामग्री के लिए लोग घंटों कतारों में खड़े हैं, लेकिन हालात इतने खराब हैं कि छोटे-छोटे बच्चे भी खाने के पैकेट के लिए छीना-झपटी करते नजर आ रहे हैं।
घटना स्थल पर बेहद मार्मिक दृश्य देखने को मिल रहे हैं। भूख और बेबसी से जूझ रहे नन्हे हाथ लंच पैकेट पाने के लिए आपस में संघर्ष कर रहे हैं। कई बच्चों के चेहरे पर डर और अनिश्चितता साफ झलक रही है।

इसी बीच एक महिला गर्मी, थकान और मानसिक तनाव के कारण बेहोश हो गई, जिसे मौके पर मौजूद लोगों और राहतकर्मियों ने संभाला। यह घटना इस बात की गवाही देती है कि हादसे का असर केवल भौतिक नुकसान तक सीमित नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी गहरा है।
तीसरे दिन भी कई परिवार अपने जले हुए घरों से टूटे-फूटे बर्तन, कपड़े और सामान समेटते दिखे। राख में बदली जिंदगी को फिर से जोड़ने की कोशिशें जारी हैं। कई लोगों ने बताया कि उनका सब कुछ जलकर खाक हो गया और अब उनके पास सिर छुपाने तक की जगह नहीं बची है।

प्रशासन की ओर से राहत कार्य जारी है, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि मदद अभी भी पर्याप्त नहीं है। कई परिवारों को अभी तक पूरी सहायता नहीं मिल पाई है।
यह अग्निकांड न केवल एक हादसा है, बल्कि यह उन व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़ा करता है, जो ऐसी घटनाओं के बाद तुरंत और प्रभावी राहत देने में नाकाम नजर आती हैं।





