यूएई का यह रणनीतिक परमाणु ऊर्जा केंद्र क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र एक बार फिर चर्चा में है। यह संयंत्र यूएई का पहला परमाणु ऊर्जा केंद्र है और इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा का अहम स्तंभ माना जाता है। अबू धाबी के अल धफरा क्षेत्र में स्थित यह संयंत्र चार रिएक्टरों वाला बड़ा परमाणु प्रोजेक्ट है, जो देश की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करने की क्षमता रखता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस रणनीतिक परमाणु संयंत्र पर किसी प्रकार का हमला होता है, तो इसका असर केवल यूएई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो सकता है। परमाणु संयंत्र पर हमले से रेडिएशन रिसाव, बड़े पैमाने पर जनहानि और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक टकराव की आशंका बढ़ सकती है।
बराकाह संयंत्र का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा रणनीति और सुरक्षा संतुलन से जुड़ा है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया पहले से ही कई संघर्षों और राजनीतिक तनावों से जूझ रहा है, इस तरह की किसी घटना से क्षेत्र में व्यापक सैन्य टकराव भड़क सकता है। वैश्विक शक्तियां भी इस पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।






