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गंगा दशहरा आज: जानिए कैसे शिव की जटाओं से धरती पर उतरीं पतितपावनी मां गंगा

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भगीरथ की तपस्या, शिव का आशीर्वाद और मां गंगा के अवतरण की पौराणिक कथा, आज क्यों खास है गंगा दशहरा

आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ गंगा दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन पतितपावनी मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना कर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा सगर के 60 हजार पुत्रों की मुक्ति के लिए राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हुईं, लेकिन उनका प्रचंड वेग धरती को नष्ट कर सकता था। तब भगवान शिव ने अपनी जटाओं में मां गंगा को समाहित कर उनके वेग को नियंत्रित किया और धीरे-धीरे धरती पर प्रवाहित किया।

इसी दिव्य घटना को गंगा अवतरण के रूप में याद किया जाता है। मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन विशेष रूप से हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज और गंगाघाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है।

Lokseva Bureau
Author: Lokseva Bureau

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