एजुकेशन फंड कैसे बनाएं, SIP या FD में क्या बेहतर, एजुकेशन लोन के फायदे-नुकसान पर एक्सपर्ट की सलाह

बढ़ती महंगाई के दौर में बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। आज इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट या विदेश में पढ़ाई के लिए लाखों से करोड़ों रुपये तक की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता-पिता को बच्चे के जन्म के साथ ही उसकी शिक्षा के लिए अलग फंड बनाना शुरू कर देना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, शिक्षा की लागत हर साल औसतन 8 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इसलिए केवल बचत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निवेश के जरिए धन बढ़ाना भी जरूरी है। लंबी अवधि के लिए SIP, म्यूचुअल फंड और इक्विटी आधारित निवेश बेहतर विकल्प माने जाते हैं, जबकि कम जोखिम पसंद करने वाले निवेशक FD और PPF जैसे साधनों का सहारा ले सकते हैं।

एजुकेशन फंड तैयार करने के लिए सबसे पहले यह अनुमान लगाना चाहिए कि भविष्य में पढ़ाई का खर्च कितना हो सकता है। इसके बाद लक्ष्य के अनुसार मासिक निवेश की योजना बनानी चाहिए। समय पर शुरू की गई छोटी-छोटी बचत भी लंबे समय में बड़ा फंड तैयार कर सकती है।
वहीं, एजुकेशन लोन भी उच्च शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है। इसका फायदा यह है कि पढ़ाई तुरंत शुरू की जा सकती है और कई मामलों में टैक्स लाभ भी मिलता है। हालांकि, पढ़ाई पूरी होने के बाद लोन चुकाने की जिम्मेदारी और ब्याज का बोझ एक चुनौती बन सकता है।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे अच्छी रणनीति यह है कि पहले से पर्याप्त एजुकेशन फंड तैयार किया जाए और जरूरत पड़ने पर ही सीमित मात्रा में एजुकेशन लोन लिया जाए। सही योजना और अनुशासित निवेश से बच्चों की शिक्षा का सपना बिना आर्थिक दबाव के पूरा किया जा सकता है।





