हर साल लाखों लिनेन गायब, रेलवे को करोड़ों का नुकसान

भारतीय रेलवे की ट्रेनों से यात्रियों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले चादर, तकिया, कंबल और तौलियों की चोरी लगातार बढ़ती जा रही है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए आंकड़ों ने इस समस्या की गंभीरता उजागर कर दी है। हर साल लाखों की संख्या में रेलवे का लिनेन (Linen) गायब हो जाता है, जिससे रेलवे को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार, लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों, विशेष रूप से एसी कोचों में यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले कंबल, चादर, तकिया और तौलिये बड़ी संख्या में लापता हो रहे हैं। कई मामलों में यात्रियों के उतरने के बाद ये सामान सीटों से गायब मिलता है, जबकि कुछ मामलों में सफाई और रखरखाव के दौरान भी सामान का हिसाब नहीं मिल पाता।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक वर्ष इन वस्तुओं को दोबारा खरीदने पर करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इससे रेलवे की परिचालन लागत भी बढ़ती है। चोरी रोकने के लिए रेलवे समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाता है और यात्रियों से अपील करता है कि वे सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करें। साथ ही कुछ ट्रेनों में निगरानी व्यवस्था और लिनेन प्रबंधन प्रणाली को भी मजबूत किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यात्री सार्वजनिक संपत्ति को अपनी जिम्मेदारी समझें और रेलवे आधुनिक ट्रैकिंग व निगरानी व्यवस्था अपनाए, तो इस तरह की चोरी पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा के दौरान उपलब्ध कराए गए चादर, तकिया, कंबल और अन्य सामान को ट्रेन से बाहर न ले जाएं। ऐसा करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे देश की सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचता है और अंततः इसका आर्थिक बोझ आम करदाताओं पर पड़ता है।






