ईरानी सरकार ने नागरिकों की मौत की पुष्टि की, तनाव और गहराया।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब और अधिक गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान के विभिन्न रणनीतिक ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर किए गए ताजा हवाई हमलों में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जबकि 260 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ईरानी सरकार ने आधिकारिक तौर पर नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत की पुष्टि करते हुए अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
हमलों के दौरान दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास, बुशेहर, होवेयज़ेह और आसपास के कई संवेदनशील क्षेत्रों में जोरदार विस्फोट हुए। कई इमारतें, आवासीय कॉलोनियां, सड़कें, बिजली व्यवस्था और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार राहत एवं बचाव दल लगातार मलबा हटाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटे हुए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने और होरमुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई जारी रही तो आगे भी सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं।
दूसरी ओर ईरान ने इन हमलों को “युद्ध की खुली घोषणा” बताते हुए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और कई देशों ने अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी है।

होरमुज़ जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है, अब एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां सतर्क हो गई हैं, जबकि तेल बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय देशों, चीन और कई अन्य देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का कहना है कि सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए, ताकि पूरे पश्चिम एशिया को बड़े युद्ध की आग में झोंकने से बचाया जा सके। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र में तनाव कम होने के तत्काल संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।






